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mahabharat 3.56.4: हे पूज्यवर! यदि आप मुझ दासी को, जो आपके चरणों में अनन्य भक्ति रखती है, स्वीकार नहीं करेंगे तो मैं आपके लिए विष, अग्नि, जल अथवा फाँसी द्वारा अपने प्राण त्याग दूँगी। ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.56: नलका दमयन्तीसे वार्तालाप करना और लौटकर देवताओंको उसका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 56: नलका दमयन्तीसे वार्तालाप करना और लौटकर देवताओंको उसका संदेश सुनाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.56.4 
यदि त्वं भजमानां मां प्रत्याख्यास्यसि मानद।
विषमग्निं जलं रज्जुमास्थास्ये तव कारणात्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे पूज्यवर! यदि आप मुझ दासी को, जो आपके चरणों में अनन्य भक्ति रखती है, स्वीकार नहीं करेंगे तो मैं आपके लिए विष, अग्नि, जल अथवा फाँसी द्वारा अपने प्राण त्याग दूँगी। ॥4॥
 
'O Honorable! If you do not accept me, your maidservant who has full devotion towards your feet, then for your sake I shall sacrifice my life by means of poison, fire, water or hanging.' ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)