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mahabharat 3.56.30: 'निषादराज! मैं उन देवताओं के समक्ष तुम्हें स्वीकार करूँगा। हे महाबाहो! ऐसा होने पर तुम्हें कोई दोष नहीं लगेगा।'॥30॥   |   mahabharat अध्याय 3.56: नलका दमयन्तीसे वार्तालाप करना और लौटकर देवताओंको उसका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 56: नलका दमयन्तीसे वार्तालाप करना और लौटकर देवताओंको उसका संदेश सुनाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.56.30 
तेषामहं संनिधौ त्वां वरयिष्यामि नैषध।
एवं तव महाबाहो दोषो न भवितेति ह॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'निषादराज! मैं उन देवताओं के समक्ष तुम्हें स्वीकार करूँगा। हे महाबाहो! ऐसा होने पर तुम्हें कोई दोष नहीं लगेगा।'॥30॥
 
'Nishadharaj! I will accept you in the presence of those gods. O mighty-armed one! You will not be blamed if this happens.'॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)