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mahabharat 3.56.18-19: यह सुनकर दमयन्ती ने शुद्ध मुस्कान के साथ अश्रुपूर्ण स्वर में राजा नल से कहा - 'हे मनुष्यों के स्वामी! मैंने एक अमोघ उपाय खोज निकाला है, जिससे आपको किसी भी प्रकार का दोष नहीं लगेगा।'   |   mahabharat अध्याय 3.56: नलका दमयन्तीसे वार्तालाप करना और लौटकर देवताओंको उसका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 56: नलका दमयन्तीसे वार्तालाप करना और लौटकर देवताओंको उसका संदेश सुनाना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  3.56.18-19 
ततो बाष्पाकुलां वाचं दमयन्ती शुचिस्मिता।
प्रत्याहरन्ती शनकैर्नलं राजानमब्रवीत्॥ १८॥
उपायोऽयं मया दृष्टो निरपायो नरेश्वर।
येन दोषो न भविता तव राजन् कथंचन॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर दमयन्ती ने शुद्ध मुस्कान के साथ अश्रुपूर्ण स्वर में राजा नल से कहा - 'हे मनुष्यों के स्वामी! मैंने एक अमोघ उपाय खोज निकाला है, जिससे आपको किसी भी प्रकार का दोष नहीं लगेगा।'
 
On hearing this Damayanti with a pure smile spoke to King Nala in a tearful voice - 'O Lord of men, I have found a flawless solution, O King! By which you will not be blamed in any way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)