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mahabharat 3.56.10: 'जिनके दण्ड के भय से इस संसार में समस्त प्राणी धर्म का पालन करते हैं, उन यमराज को कौन पति रूप में नहीं चुनेगा?॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.56: नलका दमयन्तीसे वार्तालाप करना और लौटकर देवताओंको उसका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 56: नलका दमयन्तीसे वार्तालाप करना और लौटकर देवताओंको उसका संदेश सुनाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.56.10 
यस्य दण्डभयात् सर्वे भूतग्रामा: समागता:।
धर्ममेवानुरुध्यन्ति का तं न वरयेत् पतिम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'जिनके दण्ड के भय से इस संसार में समस्त प्राणी धर्म का पालन करते हैं, उन यमराज को कौन पति रूप में नहीं चुनेगा?॥10॥
 
'Who would not choose Yamaraja as her husband, because of whose fear of punishment all living beings in this world follow the religion?॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)