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mahabharat 3.55.7: इन्द्र के ऐसा कहने पर नल ने हाथ जोड़कर कहा, 'हे देवताओं! मेरा भी वही उद्देश्य है जो आप लोगों का है; अतः मैं उसी उद्देश्य से आया हूँ, अतः मुझे दूत बनाकर मत भेजिए।'   |   mahabharat अध्याय 3.55: नलका दूत बनकर राजमहलमें जाना और दमयन्तीको देवताओंका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 55: नलका दूत बनकर राजमहलमें जाना और दमयन्तीको देवताओंका संदेश सुनाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.55.7 
एवमुक्त: स शक्रेण नल: प्राञ्जलिरब्रवीत्।
एकार्थं समुपेतं मां न प्रेषयितुमर्हथ॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र के ऐसा कहने पर नल ने हाथ जोड़कर कहा, 'हे देवताओं! मेरा भी वही उद्देश्य है जो आप लोगों का है; अतः मैं उसी उद्देश्य से आया हूँ, अतः मुझे दूत बनाकर मत भेजिए।'
 
When Indra said this, Nala folded his hands and said, 'O Gods! I too have the same purpose as you all; therefore, do not send me away as a messenger, having come for the same purpose.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)