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mahabharat 3.55.18: वे लज्जाशील सुन्दरियाँ नल के तेज से चकित हो गईं और उससे बोल भी न सकीं।   |   mahabharat अध्याय 3.55: नलका दूत बनकर राजमहलमें जाना और दमयन्तीको देवताओंका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 55: नलका दूत बनकर राजमहलमें जाना और दमयन्तीको देवताओंका संदेश सुनाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.55.18 
न तास्तं शक्नुवन्ति स्म व्याहर्तुमपि किंचन।
तेजसा धर्षितास्तस्य लज्जावत्यो वराङ्गना:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वे लज्जाशील सुन्दरियाँ नल के तेज से चकित हो गईं और उससे बोल भी न सकीं।
 
Those shy beauties were amazed by Nala's brilliance and could not even speak to him. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)