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mahabharat 3.54.8: बहुत सोच-विचार के बाद राजा ने निश्चय किया कि उनकी पुत्री अब युवा हो गई है, अतः दमयन्ती के लिए स्वयंवर का आयोजन करना उन्होंने अपना परम कर्तव्य समझा ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.54.8 
स समीक्ष्य महीपाल: स्वां सुतां प्राप्तयौवनाम्।
अपश्यदात्मना कार्यं दमयन्त्या: स्वयंवरम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
बहुत सोच-विचार के बाद राजा ने निश्चय किया कि उनकी पुत्री अब युवा हो गई है, अतः दमयन्ती के लिए स्वयंवर का आयोजन करना उन्होंने अपना परम कर्तव्य समझा ॥8॥
 
After much thought and deliberation the king decided that his daughter had now attained youth, and therefore he considered it his primary duty to organize a swayamvara for Damayanti. ॥8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)