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न शय्यासनभोगेषु रतिं विन्दति कर्हिचित्।
न नक्तं न दिवा शेते हाहेति रुदती पुन:॥ ४॥
अनुवाद
उसे अपने बिस्तर, आसन और भोग-विलास की वस्तुओं से कोई प्रेम नहीं था। वह न रात को सोती, न दिन में। वह बार-बार 'हाय! हाय!' कहकर रोती रहती।
She had no love for her bed, seat and objects of enjoyment. She would neither sleep at night nor during the day. She would keep crying repeatedly saying 'Alas! Alas!'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥