श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.54.30 
ततोऽन्तरिक्षे विष्टभ्य विमानानि दिवौकस:।
अब्रुवन्नैषधं राजन्नवतीर्य नभस्तलात्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
राजा ! तब उन देवताओं ने आकाश में अपने विमान रोक दिए और वहाँ से नीचे उतरकर निषधन के राजा से कहा - ॥30॥
 
King! Then those gods stopped their planes in the sky and came down from there and said to the King of Nishadhan - ॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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