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mahabharat 3.54.29: सूर्य के समान प्रकाशमान महाराज नल को देखकर जगत के रक्षक उनके सौन्दर्य और तेज से चकित हो गये और दमयन्ती को लुभाने का अपना संकल्प त्याग दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.54.29 
तं दृष्ट्वा लोकपालास्ते भ्राजमानं यथा रविम्।
तस्थुर्विगतसंकल्पा विस्मिता रूपसम्पदा॥ २९॥
 
 
अनुवाद
सूर्य के समान प्रकाशमान महाराज नल को देखकर जगत के रक्षक उनके सौन्दर्य और तेज से चकित हो गये और दमयन्ती को लुभाने का अपना संकल्प त्याग दिया।
 
On seeing Maharaja Nala, who radiated the light of the Sun, the protectors of the world were astounded by his beauty and splendor and gave up their resolve to woo Damayanti.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)