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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान
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श्लोक 27
श्लोक
3.54.27
नलोऽपि राजा कौन्तेय श्रुत्वा राज्ञां समागमम्।
अभ्यगच्छददीनात्मा दमयन्तीमनुव्रत:॥ २७॥
अनुवाद
विदर्भ में समस्त राजाओं का एकत्र होना सुनकर महाप्रतापी राजा नल भी दमयन्ती पर मोहित होकर वहाँ चले गये॥ 27॥
On hearing about the gathering of all the kings in Vidarbha, the magnanimous King Nala also became enamoured with Damayanti and went there.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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