श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.54.25 
ततस्ते शुश्रुवु: सर्वे नारदस्य वचो महत्।
श्रुत्वैव चाब्रुवन् हृष्टा गच्छामो वयमप्युत॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन सबने नारदजी के ये विशेष वचन सुने और उन्हें सुनकर वे सब हर्षित हो उठे और बोले - 'आओ, हम भी उस स्वयंवर में चलें'॥25॥
 
Thereafter all of them heard these special words of Naradji. On hearing them all of them were filled with joy and said - 'Let us also go to that swayamvar'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)