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mahabharat 3.54.23: हे बल और दैत्य वृत्रासुर का नाश करने वाले इन्द्र! दमयन्ती सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की एक अद्भुत मणि है। इसीलिए सभी राजा उसे पाने की इच्छा रखते हैं॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 3.54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.54.23 
तां रत्नभूतां लोकस्य प्रार्थयन्तो महीक्षित:।
काङ्क्षन्ति स्म विशेषेण बलवृत्रनिषूदन॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे बल और दैत्य वृत्रासुर का नाश करने वाले इन्द्र! दमयन्ती सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की एक अद्भुत मणि है। इसीलिए सभी राजा उसे पाने की इच्छा रखते हैं॥ 23॥
 
O Indra, the destroyer of strength and demon Vritrasura! Damayanti is a wonderful jewel of the entire universe. That is why all kings desire to have her.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)