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mahabharat 3.54.19-20h: जब इंद्र ने उनसे पूछा, "वे वीर क्षत्रिय कहाँ हैं? मैं इन दिनों अपने प्रिय अतिथियों को यहाँ आते हुए नहीं देख रहा हूँ," नारद ने उत्तर दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  3.54.19-20h 
क्व नु ते क्षत्रिया: शूरा न हि पश्यामि तानहम्।
आगच्छतो महीपालान् दयितानतिथीन् मम॥ १९॥
एवमुक्तस्तु शक्रेण नारद: प्रत्यभाषत।
 
 
अनुवाद
जब इंद्र ने उनसे पूछा, "वे वीर क्षत्रिय कहाँ हैं? मैं इन दिनों अपने प्रिय अतिथियों को यहाँ आते हुए नहीं देख रहा हूँ," नारद ने उत्तर दिया।
 
When Indra asked him, "Where are those valiant Kshatriyas? I don't see my dear guests coming here these days," Narada replied. 19 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)