vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान
»
श्लोक 15
श्लोक
3.54.15
तावर्चयित्वा मघवा तत: कुशलमव्ययम्।
पप्रच्छानामयं चापि तयो: सर्वगतं विभु:॥ १५॥
अनुवाद
उन दोनों की पूजा करके भगवान इन्द्र ने उनसे उन दोनों की तथा सम्पूर्ण जगत की कुशलक्षेम पूछी ॥15॥
After worshiping both of them, Lord Indra asked them about the well-being and health of both of them and the entire world. 15॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd