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श्लोक 3.54.12  |
तेषां भीमो महाबाहु: पार्थिवानां महात्मनाम्।
यथार्हमकरोत् पूजां तेऽवसंस्तत्र पूजिता:॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| महाबाहु राजा भीम ने वहाँ उपस्थित उन श्रेष्ठ राजाओं की यथायोग्य पूजा की, तत्पश्चात् वे भी उनकी पूजा करके वहीं रहने लगे ॥12॥ |
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| The mighty-armed King Bhima worshiped those great kings present there as befits him. After that they worshiped him and started living there. 12॥ |
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