श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  3.54.10-11 
श्रुत्वा तु पार्थिवा: सर्वे दमयन्त्या: स्वयंवरम्।
अभिजग्मुस्ततो भीमं राजानो भीमशासनात्॥ १०॥
हस्त्यश्वरथघोषेण पूरयन्तो वसुन्धराम्।
विचित्रमाल्याभरणैर्बलैर्दृश्यै: स्वलंकृतै:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
दमयन्ती का स्वयंवर होने वाला है, यह सुनकर राजा भीम की आज्ञा से विदर्भ के सभी राजा हाथी, घोड़े और रथों की गर्जना से पृथ्वी को गुंजायमान करते हुए उसकी राजधानी में गए। उस समय विचित्र मालाओं और आभूषणों से विभूषित बहुत से सैनिक उनके साथ जाते हुए दिखाई दिए॥10-11॥
 
On hearing that Damayanti's swayamvara was going to take place, all the kings of Vidarbha, on the orders of King Bhima, went to her capital, making the earth reverberate with the tumultuous sounds of elephants, horses and chariots. At that time, many soldiers adorned with strange garlands and ornaments were seen accompanying them.॥10-11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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