श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 54: स्वर्गमें नारद और इन्द्रकी बातचीत, दमयन्तीके स्वयंवरके लिये राजाओं तथा लोकपालोंका प्रस्थान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.54.1 
बृहदश्व उवाच
दमयन्ती तु तच्छ्रुत्वा वचो हंसस्य भारत।
तत: प्रभृति न स्वस्था नलं प्रति बभूव सा॥ १॥
 
 
अनुवाद
बृहदश्व मुनि कहते हैं- हे भारत! जब से दमयन्ती ने हंसकी के वचन सुने, तब से वह राजा नल पर मोहित हो जाने के कारण अस्वस्थ रहने लगी। 1॥
 
Brihadashva Muni says- India! Ever since Damayanti heard Hanski's words, she started feeling unwell because she became infatuated with King Nala. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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