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mahabharat 3.53.5: उसी समय विदर्भ में भीम नाम के एक राजा राज्य करते थे। वे एक वीर योद्धा थे और उनमें सभी गुण थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। इसलिए उनके मन में हमेशा संतान प्राप्ति की इच्छा बनी रहती थी।   |   mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.53.5 
तथैवासीद् विदर्भेषु भीमो भीमपराक्रम:।
शूर: सर्वगुणैर्युक्त: प्रजाकाम: स चाप्रज:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उसी समय विदर्भ में भीम नाम के एक राजा राज्य करते थे। वे एक वीर योद्धा थे और उनमें सभी गुण थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। इसलिए उनके मन में हमेशा संतान प्राप्ति की इच्छा बनी रहती थी।
 
Similarly, in those days, a king named Bhima ruled over Vidarbha. He was a brave warrior and had all the good qualities. He had no children. Hence, the desire to have children always remained in his heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)