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mahabharat 3.53.31-32: राजा! हंस के ऐसा कहने पर दमयन्ती ने उससे कहा - 'पक्षराज! आप नल से भी यही बात कहें।' राजा! विदर्भराज दमयन्ती से 'ऐसा ही हो' कहकर वह हंस पुनः निषध देश में आया और नल से सब बातें कह सुनाई।   |   mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  3.53.31-32 
एवमुक्ता तु हंसेन दमयन्ती विशाम्पते॥ ३१॥
अब्रवीत् तत्र तं हंसं त्वमप्येवं नले वद।
तथेत्युक्त्वाण्डज: कन्यां विदर्भस्य विशाम्पते।
पुनरागम्य निषधान्नले सर्वं न्यवेदयत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
राजा! हंस के ऐसा कहने पर दमयन्ती ने उससे कहा - 'पक्षराज! आप नल से भी यही बात कहें।' राजा! विदर्भराज दमयन्ती से 'ऐसा ही हो' कहकर वह हंस पुनः निषध देश में आया और नल से सब बातें कह सुनाई।
 
King! After the swan said this, Damayanti said to him - 'King of birds! You should say the same thing to Nala also'. King! After saying 'So be it' to Damayanti, princess of Vidarbha, that swan again came to Nishad country and told everything to Nala. 31-32.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि हंसदमयन्तीसंवादे त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें हंसदमयन्तीसंवादविषयक तिरपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)