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mahabharat 3.53.26: दमयन्ती जिस ओर दौड़ रही थी, वह हंस उससे मनुष्य वाणी में बोला- ॥26॥   |   mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.53.26 
दमयन्ती तु यं हंसं समुपाधावदन्तिके।
स मानुषीं गिरं कृत्वा दमयन्तीमथाब्रवीत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
दमयन्ती जिस ओर दौड़ रही थी, वह हंस उससे मनुष्य वाणी में बोला- ॥26॥
 
The swan towards whom Damayanti was running, spoke to her in human voice - ॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)