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mahabharat 3.53.25: फिर हंस उस सुन्दर वन में विचरण करने लगे। उस समय सब राजकुमारियाँ एक-एक करके उन हंसों का पीछा करने लगीं॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.53.25 
अथ हंसा विससृपु: सर्वत: प्रमदावने।
एकैकशस्तदा कन्यास्तान् हंसान् समुपाद्रवन्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
फिर हंस उस सुन्दर वन में विचरण करने लगे। उस समय सब राजकुमारियाँ एक-एक करके उन हंसों का पीछा करने लगीं॥ 25॥
 
Then the swans started roaming around in that beautiful forest. At that time all the princesses chased those swans one by one.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)