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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.53.24 
सा तानद्‍भुतरूपान् वै दृष्ट्वा सखिगणावृता।
हृष्टा ग्रहीतुं खगमांस्त्वरमाणोपचक्रमे॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अपनी सखियों से घिरी राजकुमारी दमयंती उन अद्भुत पक्षियों को देखकर बहुत प्रसन्न हुई और तुरन्त उन्हें पकड़ने का प्रयास करने लगी।
 
Princess Damayanti, surrounded by her friends, was overjoyed to see those wonderful birds and immediately tried to catch them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)