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mahabharat 3.53.22: हंस के ऐसा कहने पर राजा नल ने उसे छोड़ दिया और हंस वहाँ से उड़कर विदर्भ देश चले गए।   |   mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.53.22 
एवमुक्तस्ततो हंसमुत्ससर्ज महीपति:।
ते तु हंसा: समुत्पत्य विदर्भानगमंस्तत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हंस के ऐसा कहने पर राजा नल ने उसे छोड़ दिया और हंस वहाँ से उड़कर विदर्भ देश चले गए।
 
After the swan said this, King Nala released it. Then the swans flew from there and went to Vidarbha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)