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mahabharat 3.53.20: तब दिव्य हंस ने नल से कहा - 'राजन्! कृपया मुझे मत मारिए। मैं आपका प्रिय कार्य करूँगा।'   |   mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.53.20 
ततोऽन्तरिक्षगो वाचं व्याजहार नलं तदा।
हन्तव्योऽस्मि न ते राजन् करिष्यामि तव प्रियम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब दिव्य हंस ने नल से कहा - 'राजन्! कृपया मुझे मत मारिए। मैं आपका प्रिय कार्य करूँगा।'
 
Then the celestial swan said to Nala - 'King! Please do not kill me. I will do your favourite work.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)