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mahabharat 3.53.18: जब राजा नल अपने हृदय में कामवासना को छिपाने में असमर्थ हो गए, तो वे भीतरी महल के पास वाले बगीचे में चले गए और वहाँ अकेले बैठ गए।   |   mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.53.18 
अशक्नुवन्नल: कामं तदा धारयितुं हृदा।
अन्त:पुरसमीपस्थे वन आस्ते रहोगत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जब राजा नल अपने हृदय में कामवासना को छिपाने में असमर्थ हो गए, तो वे भीतरी महल के पास वाले बगीचे में चले गए और वहाँ अकेले बैठ गए।
 
When King Nala became unable to hide the sexual urge in his heart, he went to the garden near the inner palace and sat alone in it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)