Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.53.17: हे कुन्तीपुत्र! इस प्रकार निरन्तर एक-दूसरे के गुणों का श्रवण करते रहने से उन दोनों में एक-दूसरे को देखे बिना ही परस्पर प्रेम उत्पन्न हो गया। उनकी कामना दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही गई॥17॥ | mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तयोरदृष्ट: कामोऽभूच्छृण्वतो: सततं गुणान्।
अन्योन्यं प्रति कौन्तेय स व्यवर्धत हृच्छय:॥ १७॥
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! इस प्रकार निरन्तर एक-दूसरे के गुणों का श्रवण करते रहने से उन दोनों में एक-दूसरे को देखे बिना ही परस्पर प्रेम उत्पन्न हो गया। उनकी कामना दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही गई॥17॥
Kunti's son! Thus, by constantly listening and hearing each other's virtues, both of them developed love for each other without even seeing each other. Their desire kept on increasing day by day.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥