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mahabharat 3.53.16: कौतूहलवश लोग दमयन्ती के सामने नल की प्रशंसा करते थे और निषादराज भी नल के सामने दमयन्ती के सौन्दर्य की बार-बार प्रशंसा करते थे॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.53.16 
तस्या: समीपे तु नलं प्रशशंसु: कुतूहलात्।
नैषधस्य समीपे तु दमयन्तीं पुन: पुन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कौतूहलवश लोग दमयन्ती के सामने नल की प्रशंसा करते थे और निषादराज भी नल के सामने दमयन्ती के सौन्दर्य की बार-बार प्रशंसा करते थे॥16॥
 
Out of curiosity people used to praise Nala in front of Damayanti, and Nishadraja used to repeatedly praise Damayanti's beauty in front of Nala.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)