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mahabharat 3.53.14: ऐसी सुन्दर कन्या मनुष्यों में भी तथा अन्य वर्णों में भी पहले कभी न देखी गई थी, न सुनी गई थी। उस कन्या को देखने मात्र से ही मन प्रसन्न हो जाता था। वह देवताओं में भी परम सुन्दरी मानी जाती थी॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.53.14 
मानुषेष्वपि चान्येषु दृष्टपूर्वाथवा श्रुता।
चित्तप्रसादनी बाला देवानामपि सुन्दरी॥ १४॥
 
 
अनुवाद
ऐसी सुन्दर कन्या मनुष्यों में भी तथा अन्य वर्णों में भी पहले कभी न देखी गई थी, न सुनी गई थी। उस कन्या को देखने मात्र से ही मन प्रसन्न हो जाता था। वह देवताओं में भी परम सुन्दरी मानी जाती थी॥14॥
 
Such a beautiful girl had never been seen or heard of before, even among humans and people of other classes. The mind would become happy just by looking at that girl. She was considered the most beautiful girl even among the gods.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)