Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.53.11: जब वह युवा हुई, तो सौ दासियाँ और सौ सखियाँ वस्त्राभूषणों से सुसज्जित होकर उसकी सेवा में सदैव उपस्थित रहती थीं। ऐसा प्रतीत होता था मानो स्वर्ग की अप्सराएँ शची की पूजा कर रही हों। | mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब वह युवा हुई, तो सौ दासियाँ और सौ सखियाँ वस्त्राभूषणों से सुसज्जित होकर उसकी सेवा में सदैव उपस्थित रहती थीं। ऐसा प्रतीत होता था मानो स्वर्ग की अप्सराएँ शची की पूजा कर रही हों।
When she attained youth, a hundred maids and a hundred friends adorned with clothes and ornaments were always present to serve her. It was as if the celestial nymphs were worshipping Shachi. 11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥