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mahabharat 3.53.10: सुन्दर प्रदेश की दमयन्ती अपने रूप, तेज, यश, कीर्ति और सौभाग्य के कारण तीनों लोकों में विख्यात हो गई॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.53.10 
दमयन्ती तु रूपेण तेजसा यशसा श्रिया।
सौभाग्येन च लोकेषु यश: प्राप सुमध्यमा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सुन्दर प्रदेश की दमयन्ती अपने रूप, तेज, यश, कीर्ति और सौभाग्य के कारण तीनों लोकों में विख्यात हो गई॥10॥
 
Damayanti of the beautiful region became famous in all the three worlds due to her beauty, glory, fame, glory and good fortune. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)