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mahabharat 3.53.1: बृहदश्व बोले - धर्मराज! निषध देश में वीरसेन का पुत्र नल नाम का एक पराक्रमी राजा हुआ है। वह उत्तम गुणों से युक्त, सुन्दर और घुड़सवारी में निपुण था। 1॥   |   mahabharat अध्याय 3.53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 53: नल-दमयन्तीके गुणोंका वर्णन, उनका परस्पर अनुराग और हंसका दमयन्ती और नलको एक-दूसरेके संदेश सुनाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.53.1 
बृहदश्व उवाच
आसीद् राजा नलो नाम वीरसेनसुतो बली।
उपपन्नो गुणैरिष्टै रूपवानश्वकोविद:॥ १॥
 
 
अनुवाद
बृहदश्व बोले - धर्मराज! निषध देश में वीरसेन का पुत्र नल नाम का एक पराक्रमी राजा हुआ है। वह उत्तम गुणों से युक्त, सुन्दर और घुड़सवारी में निपुण था। 1॥
 
Brihadashva said – Dharamraj! In the country of Nishad, Veersen's son has become a powerful king named Nal. He was full of good qualities, handsome and skilled in the art of horse-riding. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)