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श्लोक 3.52.59  |
युधिष्ठिर उवाच
विस्तरेणाहमिच्छामि नलस्य सुमहात्मन:।
चरितं वदतां श्रेष्ठ तन्ममाख्यातुमर्हसि॥ ५९॥ |
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| अनुवाद |
| युधिष्ठिर बोले - हे वक्ताओं में श्रेष्ठ मुनि! मैं महान एवं कुलीन राजा नल का जीवनवृत्तान्त विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ। कृपया मुझे बताने की कृपा करें॥ 59॥ |
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| Yudhishthira said - O great sage amongst speakers! I wish to hear the life story of the great and noble King Nala in detail. Please be kind enough to tell me.॥ 59॥ |
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इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि द्विपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें बृहदश्वयुधिष्ठिरसंवादविषयक बावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५२॥
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