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mahabharat 3.52.57: हे राजन! उसके पास न तो कोई सेवक था, न रथ, न भाई और न ही कोई सम्बन्धी। जब वह वन में था, तब ये सब वस्तुएँ उसके पास कभी नहीं थीं।   |   mahabharat अध्याय 3.52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  3.52.57 
न तस्य दासा न रथो न भ्राता न च बान्धवा:।
वने निवसतो राजञ्छिष्यन्ते स्म कदाचन॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उसके पास न तो कोई सेवक था, न रथ, न भाई और न ही कोई सम्बन्धी। जब वह वन में था, तब ये सब वस्तुएँ उसके पास कभी नहीं थीं।
 
O King! He had neither servants nor chariots, nor brothers nor relatives. These things were never with him while he was in the forest. 57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)