श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.52.53 
वैशम्पायन उवाच
अथैनमब्रवीद् राजा ब्रवीतु भगवानिति।
इमामवस्थां सम्प्राप्तं श्रोतुमिच्छामि पार्थिवम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! तब राजा युधिष्ठिर ने मुनि से कहा - 'भगवन् ! कृपा करके मुझे बताइये । मैं मेरे समान कठिन परिस्थिति में पहुँचे हुए राजा की कथा सुनना चाहता हूँ ॥ 53॥
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! Then King Yudhishthira said to the sage - 'Lord! Please do tell me. I want to hear the story of a king who has reached a difficult situation like me.' ॥ 53॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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