श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.52.50 
अस्ति राजा मया कश्चिदल्पभाग्यतरो भुवि।
भवता दृष्टपूर्वो वा श्रुतपूर्वोऽपि वा क्वचित्।
न मत्तो दु:खिततर: पुमानस्तीति मे मति:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
क्या इस पृथ्वी पर मेरे समान कोई दूसरा अभागा राजा है? अथवा क्या तुमने पहले कभी मेरे समान किसी राजा को देखा या सुना है? मैं तो ऐसा मानता हूँ कि मुझसे अधिक दुःखी कोई दूसरा मनुष्य नहीं है॥50॥
 
‘Is there any other king on this earth who is as unfortunate as me? Or have you ever seen or heard of a king like me before? I believe that there is no other man who is more unhappy than me.’॥ 50॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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