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mahabharat 3.52.48: 'यहाँ, हम सबकी आत्मा जिस गाण्डीव धनुषधारी अर्जुन में निवास करती है, वह भी हमसे भिन्न है। महात्मा अर्जुन के बिना मैं प्राणहीन हो गया हूँ। 48॥   |   mahabharat अध्याय 3.52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  3.52.48 
यस्मिंश्चैव समस्तानां प्राणा गाण्डीवधन्वनि।
विना महात्मना तेन गतसत्त्व इवाभवम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
'यहाँ, हम सबकी आत्मा जिस गाण्डीव धनुषधारी अर्जुन में निवास करती है, वह भी हमसे भिन्न है। महात्मा अर्जुन के बिना मैं प्राणहीन हो गया हूँ। 48॥
 
'Here, the Gandiva bow-wielding Arjun in whom the soul of all of us resides, is also different from us. Without Mahatma Arjun, I have become lifeless. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)