Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.52.45: 'जब मैं एक बार जुए के झंझट से बच गया, तो उसने फिर पासों का खेल आयोजित किया और मुझे हरा दिया। मुझे मृगचर्म पहनाकर, उसने मुझे इस महान वन में निर्वासन के कष्ट सहने के लिए भेज दिया। | mahabharat अध्याय 3.52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'जब मैं एक बार जुए के झंझट से बच गया, तो उसने फिर पासों का खेल आयोजित किया और मुझे हरा दिया। मुझे मृगचर्म पहनाकर, उसने मुझे इस महान वन में निर्वासन के कष्ट सहने के लिए भेज दिया।
'After I had once escaped from the trouble of gambling, he again organized a game of dice and defeated me. After dressing me in a deerskin, he banished me to this great forest to endure the excruciating pains of exile.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥