Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.52.44: 'मैं जुआ खेलने में माहिर नहीं हूँ। फिर भी मेरी पत्नी द्रौपदी को, जो मेरे प्राणों से भी अधिक गौरवशाली है, पाप-विचार वाले उन दुष्ट लोगों ने उसके बालों से पकड़कर सभा में घसीटा। | mahabharat अध्याय 3.52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनक्षज्ञस्य हि सतो निकृत्या पापनिश्चयै:।
भार्या च मे सभां नीता प्राणेभ्योऽपि गरीयसी॥ ४४॥
अनुवाद
'मैं जुआ खेलने में माहिर नहीं हूँ। फिर भी मेरी पत्नी द्रौपदी को, जो मेरे प्राणों से भी अधिक गौरवशाली है, पाप-विचार वाले उन दुष्ट लोगों ने उसके बालों से पकड़कर सभा में घसीटा।
'I am not an expert in gambling. Yet my wife Draupadi, who is more glorious than my life, was dragged by her hair into the court by those wicked people who had sinful thoughts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥