श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.52.42 
आश्वस्तं चैनमासीनमुपासीनो युधिष्ठिर:।
अभिप्रेक्ष्य महाबाहु: कृपणं बह्वभाषत॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जब वह आसन पर बैठ गया और थकान से विश्राम कर चुका, तब महाबाहु युधिष्ठिर उसके पास बैठ गए और उसकी ओर देखकर अत्यन्त विनम्र वचन बोले-॥42॥
 
When he had sat on the seat and had rested from fatigue, then the mighty-armed Yudhishthira sat beside him and looking at him spoke in very humble words -॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)