श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.52.41 
तमभिप्रेक्ष्य धर्मात्मा सम्प्राप्तं धर्मचारिणम्।
शास्त्रवन्मधुपर्केण पूजयामास धर्मराट्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा धर्मराज युधिष्ठिर ने धर्मानुष्ठान करने वाले महात्माओं को आते देख शास्त्रानुसार मधुपर्क से उनकी पूजा की ॥ 41॥
 
The virtuous Dharmaraja Yudhishthira, seeing the great souls performing religious rituals coming, worshipped them with Madhupark according to the scriptures. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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