श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.52.39 
अन्तरेणापि कौन्तेय निकृतिं पापनिश्चयम्।
हन्ता त्वमसि दुर्धर्ष सानुबन्धं सुयोधनम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
'कुंतीपुत्र! तुम एक प्रचंड योद्धा हो। बिना छल-कपट के भी तुम पाप-विचार वाले सुयोधन को उसके बन्धुओं सहित नष्ट कर सकते हो।'
 
'Kunti's son! You are a fierce warrior. Without resorting to deceit or fraud, you can destroy Suyodhana, who has sinful thoughts, along with his relatives.'
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd