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mahabharat 3.52.32: 'हे नरदेव! आप तो भली-भाँति जानते हैं कि वह अज्ञानी शकुनि जुए की कला में कितना निपुण है। यदि वह हार गया, तो आपको पुनः वनवास जाना पड़ेगा।'   |   mahabharat अध्याय 3.52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.52.32 
स तथाक्षेषु कुशलो निश्चितो गतचेतन:।
चरिष्यसि महाराज वनेषु वसती: पुन:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'हे नरदेव! आप तो भली-भाँति जानते हैं कि वह अज्ञानी शकुनि जुए की कला में कितना निपुण है। यदि वह हार गया, तो आपको पुनः वनवास जाना पड़ेगा।'
 
'Lord of men! You know very well how skilled that ignorant Shakuni is in the art of gambling. If he loses, you will again have to go into exile.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)