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mahabharat 3.52.27: 'राजेन्द्र! तुमने द्यूतक्रीड़ा में मग्न होकर इतनी बड़ी विपत्ति उत्पन्न कर दी कि हम सब को वनवास के कष्ट में डाल दिया॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.52.27 
द्यूतप्रियेण राजेन्द्र तथा तद् भवता कृतम्।
प्रायेणाज्ञातचर्यायां वयं सर्वे निपातिता:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'राजेन्द्र! तुमने द्यूतक्रीड़ा में मग्न होकर इतनी बड़ी विपत्ति उत्पन्न कर दी कि हम सब को वनवास के कष्ट में डाल दिया॥ 27॥
 
'Rajendra! Being engrossed in the game of gambling you caused such a great misfortune that you almost threw all of us into the trouble of exile.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)