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mahabharat 3.52.24: 'प्रभो! महाराज! इसी प्रकार यह वैदिक उक्ति सदैव सुनने में आती है कि कृच्छव्रत करने से एक वर्ष पूरा होता है।'   |   mahabharat अध्याय 3.52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.52.24 
तथैव वेदवचनं श्रूयते नित्यदा विभो।
संवत्सरो महाराज पूर्णो भवति कृच्छ्रत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'प्रभो! महाराज! इसी प्रकार यह वैदिक उक्ति सदैव सुनने में आती है कि कृच्छव्रत करने से एक वर्ष पूरा होता है।'
 
'Lord! Maharaj! Similarly, this Vedic saying is always heard that by performing the Krichchha-vrata, one year is completed. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)