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श्लोक  3.52.20 
यज्ञैश्च विविधैस्तात कृतं पापमरिंदम।
अवधूय महाराज गच्छेम स्वर्गमुत्तमम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'पिताजी! शत्रुनाशक! महाराज! नाना प्रकार के यज्ञ करके और अपने पापों को धोकर हम उत्तम स्वर्ग में जाएँगे।
 
'Father! Enemy-destroyer! Maharaj! After performing various types of sacrifices and washing away our sins, we shall go to the best heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)