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श्लोक 3.52.2  |
वैशम्पायन उवाच
अस्त्रहेतोर्गते पार्थे शक्रलोकं महात्मनि।
आवसन् कृष्णया सार्धं काम्यके भरतर्षभा:॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| वैशम्पायनजी ने कहा-राजन्! महात्मा अर्जुन के अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा के लिये इन्द्रलोक चले जाने पर भरतकुलभूषण पाण्डव द्रौपदी के साथ काम्यकवन में रहने लगे। 2॥ |
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| Vaishampayanji said – King! After Mahatma Arjuna went to Indralok for the study of weapons, Bharatkulbhushan Pandavas started living in Kamyakavan with Draupadi. 2॥ |
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