vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना
»
श्लोक 19
श्लोक
3.52.19
मया प्रशमिते पश्चात् त्वमेष्यसि वनात् पुन:।
एवं कृते न ते दोषा भविष्यन्ति विशाम्पते॥ १९॥
अनुवाद
मेरे शत्रुओं का नाश करने के पश्चात् तुम तेरह वर्ष के पश्चात् वन से लौटोगे। हे प्रजानाथ! ऐसा करने से तुम्हें कोई दोष नहीं लगेगा।॥19॥
‘After I have destroyed the enemies, you will return from the forest after thirteen years. O Prajanath! You will not be blamed for doing this.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×