श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.52.19 
मया प्रशमिते पश्चात् त्वमेष्यसि वनात् पुन:।
एवं कृते न ते दोषा भविष्यन्ति विशाम्पते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
मेरे शत्रुओं का नाश करने के पश्चात् तुम तेरह वर्ष के पश्चात् वन से लौटोगे। हे प्रजानाथ! ऐसा करने से तुम्हें कोई दोष नहीं लगेगा।॥19॥
 
‘After I have destroyed the enemies, you will return from the forest after thirteen years. O Prajanath! You will not be blamed for doing this.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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