श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  3.52.17-18 
व्यूढानीकान् महाराज जवेनैव महामते।
धार्तराष्ट्रानमुं लोकं गमयामि विशाम्पते॥ १७॥
सर्वानहं हनिष्यामि धार्तराष्ट्रान् ससौबलान्।
दुर्योधनं च कर्णं च यो वान्य: प्रतियोत्स्यते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'महाराज! महामते! धृतराष्ट्र के पुत्र चाहे कितनी भी सेनाएँ बना लें, हम उन्हें शीघ्र ही यमलोक पहुँचा देंगे। मैं स्वयं शकुनि सहित धृतराष्ट्र के सभी पुत्रों का वध करूँगा। दुर्योधन, कर्ण अथवा अन्य जो भी योद्धा मेरा सामना करेगा, मैं उसे अवश्य मार डालूँगा।॥ 17-18॥
 
‘Maharaj! Mahamate! No matter how many armies the sons of Dhritarashtra build, we will soon make them travel to Yamaloka. I myself will kill all the sons of Dhritarashtra including Shakuni. I will surely kill Duryodhan, Karna or any other warrior who will face me.॥ 17-18॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd