श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.52.16 
प्राग् द्वादशसमा राजन् धार्तराष्ट्रान्निहन्महि।
निवर्त्य च वनात् पार्थमानाय्य च जनार्दनम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! बारह वर्ष पूरे होने से पहले हम अर्जुन को वन से वापस लाकर भगवान श्रीकृष्ण को बुलाकर धृतराष्ट्र के पुत्रों का वध कर सकते हैं॥16॥
 
'O King! Before the twelve years are over we can bring Arjun back from the forest and call Lord Krishna and kill the sons of Dhritarashtra.॥ 16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd